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गजल

इधर भी गधे हैं उधर भी गधे हैं सभी बस दुलत्ती उठाए खड़े हैं। किसी बात में कोई कम क्या किसी से सभी ज्ञान के बोझ से ही दबे हैं। उधर सांप का डर सताए तो सुन लो इधर जाइएगा तो अजगर पड़े हैं। उन्होंने ही नफरत का विष बीज बोया वही प्रेम की जो पीएचडी पढ़े हैं। नदी ने कहा डर न गैरों से नाविक डुबाएंगे वो ही जो अपने सगे हैं। हुए मीर जाफर व जयचंद लेकिन भगत सिंह आजाद भी तो हुए हैं। नमन अष्ट अंगों से है इस धरा को मृदा में इसी के पले हैं बढ़े हैं।

दो गजलें

(1) जिनके आगे अटक रहा हूं मैं। सिर्फ उनको खटक रहा हूं मैं। एक तेरा पता नहीं मिलता इसलिए ही भटक रहा हूं मैं। शेष सारे विषय में डिसडिंक्शन  इश्क ही में लटक रहा हूं मैं। तेरे हक की दुआएं मिल जाएं हर कहीं सिर पटक रहा हूं मैं। तुझको देखूं या चांद को देखूं  देखता एकटक रहा हूं मैं। दूर तुझसे बुला रही दुनिया और गर्दन झटक रहा हूं मैं। रूप का स्वाद चख रहे कौवे बैठा आंसू गटक रहा हूं मैं। (2) भागो छोड़ो समझाना बेकार है। यदि बंदर के हाथों में तलवार है। लायक जगहों पर काबिज हैं नालायक इतने का ही सारा बंटाधार है। घटना का सच कह दोगे तो मारेगी दुनिया को बस अपना सच स्वीकार है। प्यार भरा है गुस्से से पापा जी का मां के गुस्से में भी थोड़ा प्यार है। बच्चे कबसे बैठे हैं चौखट पर ही इक मां के बिन सारा घर बेजार है। एक झरोखा रह जाता तो अच्छा था आंगन में उठने वाली दीवार है। अंधों की नगरी के काना राजा को मन के लूले लंगड़ों की दरकार है।

गजल

बाहुबल चारों दिशाओं को विजित करता रहा प्रेम केवल मन हमारा ही मुदित करता रहा। तोड़ने वाले हमेशा फूल लेकर चल दिए मैं सभी को कंटको से ही विदित करता रहा। हाथ से वो भी गया था हाथ से ये भी गया जो दुराहे पर खड़ा मन ही भ्रमित करता रहा। मारकर सुकरात मीरा यीशु और मंसूर को राजसत्ता इस तरह से देशहित करता रहा। एक चुटकी छांव की खातिर फिरा वो उम्र भर और खुद ही भूमि को जंगल रहित करता रहा।

गजल

खोल देंगे सीवरों के पट सभी कर दिया दिल को अगर दरिया कभी इस धरा पर जीव के अस्तित्व की आखिरी लगने लगी है ये सदी अपना सोचो उसकी चिंता मत करो वह जो खुद अवतार है या है नबी फिक्र थोड़ी पेड़ पौधों की करो इससे पहले सूख जाए हर नदी। रो रही है धरती हमारी सोचकर क्या पता था नेकियां देंगी बदी। 

स्वतंत्रता और लोकतंत्र

स्वतंत्रता और लोकतंत्र ****************** "लोकतंत्र के जंगल में कुत्ते जितना भौंकने के लिए स्वतंत्र हैं गीदड़ उतना ही हुक्का हुआँ करने के लिए भी, इसलिए किसी गधे ने ऊंटों के बिलबिलाने पर ढेचू ढेचू नहीं करना चाहिए...!" यह बात बिल्ली ने चूहे को पंजे में पकड़कर कही तब तक टर्राते हुए मेढ़क को धामिन साँप ने निगल लिया। टीले पर बैठी चील ने घास पर उछल रहे खरगोश को देखते ही झपट्टा मारा और उसे ले उड़ी। अपने घोंसले में शांत  बैठी चिड़िया ने इन घटनाओं पर समीक्षक दृष्टि रखते हुए चिड़े से कहा - "किताबों में स्वतंत्रता की परिभाषाएं कुछ भी लिखी हों लेकिन जंगल के अघोषित-सर्वमान्य परंपरा के मुताबिक यहां का हर रहवासी अपनी 'क्षमता' तक ही स्वतंत्र है।"

दोस्ती

"मैने पहले को फोन किया उसने नहीं उठाया क्योंकि उसे लगा मैं बड़ा अधिकारी हूं जरूर इसका कोई काम पड़ा होगा इसलिए फोन कर रहा है। मैने दूसरे को फोन मिलाया उसने भी नहीं उठाया क्योंकि उसे लगा वो एक पत्रिका का संपादक है और मैं उसे कुछ छपवाने का जुगाड़ लगाने के लिए फोन कर रहा हूं। मैने तीसरे को फोन किया उन्होंने भी नहीं उठाया, वो कवि सम्मेलनों के आयोजक हैं उन्हे भी लगा शायद मंच पर पहुंचने का जुगाड़ ढूढ़ रहा होगा। मैने चौथे को फोन किया वो मेरा उपरोक्त तीनों से खास दोस्त था उसने भी फोन नहीं उठाया क्योंकि उसे लगा इतनी रात में मैं किसी जरूरत से ही फोन कर रहा होऊंगा।" "लेकिन यार तुम्हे इतने लोगों को एक साथ फोन करने की जरूरत ही क्या थी?" "अरे उस्ताद! दरअसल वो लोग एक पार्क में बैठकर पार्टी कर रहे थे और मैं उन्हें ये बताने के लिए फोन कर रहा था कि उनकी बीवियां उन्हे ढूढते हुए इस ओर ही आ रही हैं।" #चित्रगुप्त

सलाह

 सलाह ***** चील का बच्चा उड़ना सीख रहा था कि चीड़ के पेड़ से टकराकर नीचे गिरा और घायल हो गया। वह जहां गिरा, वहीं चूहों की मांद थी। चुहिया धूप सेंकने अपने बिल से बाहर निकली तो उसे घायल चील के बच्चे को देखकर बड़ी दया आयी। उसने चील के बच्चे को समझाते हुए कहा - "देख बेटा ये तुम्हारे बिल खोदना सीखने की उम्र है इस उम्र को तुमने उड़ने के सपने देखकर बर्बाद नहीं करना चाहिए।"