पांच लघुकथाएं
हरामी आदमी
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आज सुबह से ही मेरे पड़ोसी द्वारका जी ने खटर पटर मचा रखी थी। वैसे वो रोज बड़े आराम से उठते थे, पर आज शायद कहीं जाना हो इसलिए सुबह जल्दी ही उठकर गाय भैसों का काम निपटा रहे थे...
वैसे वो गांव के ही प्राइमरी स्कूल में सरकारी अध्यापक हैं। पर मैं जबसे उन्हें जानता हूँ विद्यालय जाना उनके लिए एक फालतू का ही काम है। जब मन होता है चले जाते हैं और फिर जब मन होता है वापस आ जाते हैं। सुबह आराम से उठकर वे पहले जानवरों को निपटाते हैं। भैसों का दूध निकालते हैं उसे दूध वाले को देते हैं। कोई खेती किसानी का काम हुआ तो उसे भी करते हैं फिर सब कुछ निपटाकर जब आराम करना होता है स्कूल चले जाते हैं। स्कूल जाने का समय उनके लिए कोई ख़ास मायने नहीं रखता जब घर का काम समाप्त हुआ चले गये। बीच में भी कोई काम पड़ा या कोई रिश्तेदार ही आ गया और घर से कोई फोन गया तो वापस आ जाते हैं। जब फोन की सुविधा नहीं थी तो उन्हें किसी को बुलाने भेजना पड़ता था। जब कोई उपलब्ध नहीं होता था तो ये शुभ काम मास्ट्राइन को ही करती थीं, पर जबसे फोन की सुविधा हुई है? मास्ट्राइन का काम आसान हो गया है। अब वो बैठे बैठे फोन घुमा देती हैं और मास्टर साहब भागे- भागे आ जाते हैं।
महीने के बाकी दिन तो वो आराम से ही उठते हैं पर तेरस के दिन वो शंकर जी को जल चढ़ाने जरूर जाते हैं और कोई उनसे पहले न चढ़ा दे इसलिए जल्दी भी जाते हैं। लेकिन आज तो तेरस भी नहीं है और अभी कोई तीर्थ जाने का भी समय नहीं फिर इतनी जल्दी उठकर सारे काम निपटाने का क्या कारण हो सकता है? मैं यही सब सोचता हुआ उठा और अपने काम में लग गया।
वे काम निपटाते हुए जोर जोर से गालियां भी दे रहे थे। ये सब देख सुनकर जब मुझसे रहा नहीं गया तो जाकर पूछ ही लिया।
"क्या हुआ मास्टर साहब आज सुबह से ही बड़े ख़फा नजर आ रहे हो? कोई गड़बड़ हो गई क्या?"
"कोई ख़ास बात नहीं है भैया बस अभी जो बीएसए आया है न? बड़ा 'हरामी आदमी' है। बोला है कि किसी भी स्कूल में औचक निरीक्षण करूंगा और जो अनुपस्थित पाये गये उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही करूंगा। बस यही बात है। अब आज से समय पर स्कूल जाना पड़ेगा। नहीं तो नौकरी खतरे में पड़ जाएगी?"
टाइम होने वाला था इसलिए मास्टर साहब तो बाल्टी उठाकर नहाने चले गये पर मैं तब से ही बैठा सोंच रहा हूँ कि हरामी कौन है? अपना काम के लिए अपने मातहतों पर दबाव डालने वाला या काम चोरी की महाभारत के ये महारथी...
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(2)
अच्छा आदमी
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"अरे काका भैंस को ट्रैक्टर के टायर में चारा खिला रहे हो..."
"तो क्या करें भैया बहुत बदमाश है ये ... सीमेंट की नाद बनवाने का बजट नहीं है और मिट्टी वाला दो बार ला चुका दूसरे दिन ही फोड़ देती है। ये टायर लंबरदार के यहाँ से उठा लाया था उसी से काम चल रहा है।"
"काका ... गाँव में इतना बड़ा स्कूल बन रहा है और आप सीमेंट वाला नाद बनाने के लिए बजट का रोना रो रहे हो? लालू बेचन लल्लन सोमई मगरे ... सबने दो दो चार चार बना लिये बस एक तुम ही हो जो खाली हाथ पर हाथ धरे बैठे रह गये।"
"हाँ बात तो तुम ठीक कह रहे हो भैया! लेकिन वहाँ तो चौकीदार रहता है कहीं सामान उठाते हुए देख लिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे?"
"उसकी चिंता मत करो काका 'वो बहुत अच्छा आदमी है' उसे एक चिलम गांजा पिला दो बस जितना बालू सरिया सीमेंट चाहिए उठा लो..."
"बच्चों के लिए स्कूल बन रहा है और उसके सामानों को एक चिलम गांजे के बदली नीलाम करने वाले को अच्छा आदमी बोलोगे तो फिर घटिया आदमी किसे बोलोगे?"
उनकी बातों को सुनकर काकी जो ओसारे में झाड़ू लगा रही थीं कमर सीधा करते हुए बोलीं और फिर झाड़ू लगाने लगीं।
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(3)
कोरोना टेस्ट
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घटते मैनपॉवर और बढ़ते कोरोना के आंकड़ों से त्रस्त एक मिल मालिक ने कोरेण्टाइन किये गए अपने मजदूरों के कोरोना परीक्षण के लिए आये मेडिकल स्टाफ से साठ-गांठ करके नमूने मजदूरों की नाक से न दिलवाकर सीधे पानी के टब से कलेक्ट करवाया।
सैम्पल मेडिकल परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया गया और चौबीस घंटे बाद रिपोर्ट भी आ गई। प्रति सौ आदमी की रिपोर्ट में औसतन साठ आदमी पॉजिटिव पाये गये।
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(4)
मजदूर मरा है...
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बारात विदाई की सारी तैयारियां हो चुकी थी। हॉल के बाहर कारें पंक्ति बद्ध खड़ी थीं। गाने बजाने के सारे इंस्ट्रूमेंट अब तक बंद हो चुके थे। प्रोग्राम ऑर्गनाइजर काम को जल्दी निपटाने के चक्कर में मेहमानों के पीछे पीछे घूम रहे थे, कि अचानक चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। अगले ही पल इस बात का भी खुलासा हो गया कि किसी को करंट लग गया है। सब अपने अपने अजीजों की टोह लेने लगे। मंटू कहाँ है मंटू? अच्छा अच्छा वो वहाँ है। किसी ने आवाज लगाया ऋषि..! अच्छा वो भी सुरक्षित है।
शादी का खुशनुमा माहौल देखते ही देखते अफरातफरी में बदल गया युवक इधर से उधर दौड़ने लगे, बिजुर्गवार अपनों को आवाज लगाने लगे महिलाएं रोने चिल्लाने लगीं..
भागमभाग के इस माहौल में मैनेजर आकर सूचना दी कि परेशानी की कोई बात नहीं है। 'मजदूर था!'
'अच्छा मजदूर था!'
'अच्छा अच्छा मजदूर था!'
'अच्छा अच्छा बिजली का काम करने वाला था मर गया बेचारा...'
'चलो चलो अपना काम करो मजदूर था!'
'अच्छा अच्छा मजदूर था।'
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(5)
सेक्युलरिज्म
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नेता जी ने बैठक में पहुंचते ही एक छुटभैया को तलब किया।
"कहिये जनाब आज का माल मसाला क्या है?"
"गंगाराम का फोन आया था दादा ..."
"कौन गंगाराम?"
"अरे वही अपना गंगाराम शास्त्री..."
"हाँ हाँ , क्या बोल रहा था? वो तो एक नंबर का आदमी है भाई... गीता मिश्रा और अकरम की शादी वाले केस में वो न होता तो अब तक हम जेल में होते।"
"बिल्कुल दादा... और वो जुनैद वाले प्रकरण में भी उसने काफी मेहनत की थी नहीं वो प्रियंका रावल का बाप तो हम लोगों के पीछे ही पड़ गया था।"
"बिल्कुल भाई ... "
"हाँ और नहीं तो क्या ? वो तरक्की पसंद और सेक्युलर आदमी है। सामाजिक सौहार्द पर उसके लेख पढ़िए। बड़े बड़ों के कान काट देता है। लेकिन वो बोल क्या रहा था कोई नया मैटर तो नहीं आ गया? कुछ ऐसा हो तो आई टी सेल वालों को एक्टिव कर देते हैं।"
"मामला ऐसा ही है दादा लेकिन इसबार गंगाराम का खुद का ही चक्कर है।"
"उसका चक्कर...?"
"हाँ दादा आई टी सेल में काम करने वाली अपनी रुकसाना है न उसी के साथ उसका चक्कर है अभी दोनों शादी करने का सोच रहे हैं उसी मामले में आपसे बात करना चाहता था।"
"अरे यार फोन लगाओ उसे अभी के अभी... ये नहीं हो सकता बड़ी मुश्किल से तो इन लोगों के बीच हमारी पैठ बनी है। पूरा बंटाधार करा देगा ये तो...मामला साम्प्रदायिक हो जाएगा समझो यार तुम लोग!"
"लेकिन सर मोहम्मद कासिम और सुरेखा बर्मा वाला मैटर भी है उसका क्या करना है? उसे भी अभी ठंडे बस्ते में डलवा दें क्या?"
"नहीं नहीं वो ठीक है यार वो तो अपनी सेक्युलर छवि के लिए जरूरी है।"
#चित्रगुप्त
दिवाकर पांडेय चित्रगुप्त
ग्राम जलालपुर
पोस्ट कुरसहा
जिला बहराइच
उत्तर प्रदेश
272821
मोबाइल -7526055373
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