सोशल मीडिया के अनसोशल लोग ******************************* (१) फेसबुक पर एक बड़े अधिकारी हैं और बढ़िया लेखक भी हैं। हालांकि बड़ा अधिकारी बढ़िया लेखक न होकर भी बड़ा लेखक ही माना जाता है। क्योंकि उसकी मेज पर जिसके काम की फाइलें पड़ी धूल फांक रही होती हैं वो तो उसकी पोस्ट से लेकर उसके द्वारा किए गए कमेंट और उसकी रिप्लाई तक में लाइक मार आता है। वहीं उससे जिसका काम नहीं भी होता है वह भी इस उम्मीद में उसकी जय-जय करते नहीं थकता कि क्या पता कब कहां जरूरत पड़ जाए। वो अधिकारी संयोग से मेरे फेसबुक मित्र भी हैं। उनकी प्रत्येक पोस्ट पर हजार के आसपास लाइक कमेंट आते हैं। उनके लिखे का प्रचार प्रसार ठीक-ठाक है। कुछ साल पहले मैने उनकी किताब पर समीक्षा लिखी जो एक बड़ी पत्रिका में छपी भी। समीक्षा उनके किताब की थी शायद इसीलिए छपी भी वरना मुझे नहीं लगता कि उस पत्रिका के संपादक ऐसे मेरी लिखी समीक्षा छापते। उन्होंने मुझे समीक्षा छपने की सूचना भी दी और उसके फोटो के साथ मुझे टैग करके फेसबुक पर पोस्ट डाला जिसका नोटिफिकेशन भी मुझे मिला लेकिन जब मैंने वो नोटिफिकेशन खोला तब तक उन्होंने मुझे टैग से रिमूव क...
बड़के साहब बड़के कवि ******************* साहब को कुछ दिन पहले तक संगीतकार बनने की खुजली लगी थी। तभी उन्होंने दो चार तंबूरे मंगवा लिए थे। उसे दो चार दिन ठोंका पीटा बजाया फिर चार छः बार हाथ काट लेने के बाद उन्हें ये अकल आ गई कि संगीत उनके वश का नहीं है। बड़ा साहब होना कोई इतनी छोटी बात तो होती नहीं है कि वो इतनी आसानी से हार मान लें। उन्होंने थोड़ा सा दिमाग लगाया जो कि है भी उनके पास थोड़ा ही तो कविता के जसामत की शामत आ गई। उन्होंने प्रेम कवियों पर मर मिटने वाली आधुनिकाओं के बारे में बारे में सुन रखा था। इस आकर्षण ने पहले भी उनका जीना हराम किया था लेकिन तब इस बीज में अंकुरण नहीं हो पाया था। समय के हवा पानी से धरती फूटी और अंकुर बाहर निकल आया। कविताओं की करीब दर्जन भर किताबें मंगाकर उसे हफ्ते भर सिरहाने रखकर सोने के बाद उन्हें इस बात का एहसास होने लगा कि वो कवि ही हैं। फिर क्या था उन्होंने कलम पकड़ ली और सादे कागज का गला घोटने पर उतारू हो गए। "बड़े साहब कविता लिख रहे हैं।" एक चपरासी ने आकर दफ्तर में सूचना दी। बड़े बाबू जिन्हें मोबाइल पर कुछ भी लिखना नहीं आता था। उन्...
तोलनी ब्याह ************* अपने ही देश में एक ऐसी जगह है जहां पहली बार लड़की को पीरियड आने पर जश्न मनाया जाता है। यह अनोखी परंपरा असम के बोगांइ गांव जिले के सोलमारी में मनाई जाती है जो कि सालों से चली आ रही है। आज भी इस परंपरा को जारी रखा गया है। यहां जब लड़की को पहली बार पीरियड आता है तो उसके माता-पिता उसकी शादी केले के पेड़ से करवा देते हैं। इस अनोखी शादी को तोलिनी ब्याह कहा जाता है। यह तोलिनी ब्याह पीरियड के पहले दिन ही किया जाता है। उसके बाद लड़की को ऐसे कमरे में रहना होता है जहां सूरज की रोशनी न पड़ें। इतना ही नहीं उसे पका हुआ खाना देने की अनुमति नहीं है। उसे केवल कच्चा दूध, फल खाने को दिए जाते हैं। पीरियड्स के दौरान उसे जमीन पर सोना होता है और वह किसी का चेहरा तक नहीं देख सकती है।
Comments
Post a Comment